Search powered by Google. Results may include advertisements.

केदारनाथ भारत के उत्तराखण्ड राज्य के गढ़वाल मण्डल के रुद्रप्रयाग ज़िले में स्थित एक नगर है।

यह केदारनाथ मंदिर का शिवलिंग बारह ज्योतिर्लिंग में से एक है, जिसे चारधाम और पंच केदार में गिना जाता है। 

यह केदारनाथ धाम के कारण प्रसिद्ध है, जो हिन्दू धर्म के अनुयाइयों के लिए पवित्र स्थान है। यहाँ स्थित केदारनाथ मंदिर का शिवलिंग बारह ज्योतिर्लिंग में से एक है, और हिन्दू धर्म के चारधाम और पंच केदार में गिना जाता है। श्रीकेदारनाथ का मंदिर 3,593 मीटर की ऊँचाई पर बना हुआ एक भव्य एवं विशाल मंदिर है। इतनी ऊँचाई पर इस मंदिर को कैसे बनाया गया, इस बारे में आज भी पूर्ण सत्य ज्ञात नहीं हैं। सतयुग में शासन करने वाले राजा केदार के नाम पर इस स्थान का नाम केदार पड़ा। राजा केदार ने सात महाद्वीपों पर शासन और वे एक बहुत पुण्यात्मा राजा थे। उनकी एक पुत्री दो पुत्र थे। पुत्रका नाम कार्तिकेय (मोहन्याल) व गणेश था। गणेश बुद्दि व कार्तिकेय शक्ति के राजा देवता के रुपमे संसार प्रसिद्द है।उनकी एक पुत्री थी वृंदा जो देवी लक्ष्मी की एक आंशिक अवतार थी। वृंदा ने 60,000 वर्षों तक तपस्या की थी। वृंदा के नाम पर ही इस स्थान को वृंदावन भी कहा जाता है। यहाँ तक पहुँचने के दो मार्ग हैं।



पहला 14 किमी लंबा पक्का पैदल मार्ग है जो गौरीकुण्ड से आरंभ होता है। गौरीकुण्ड उत्तराखंड के प्रमुख स्थानों जैसे ऋषिकेश, हरिद्वार, देहरादून इत्यादि से जुड़ा हुआ है। दूसरा मार्ग है हवाई मार्ग, अभी हाल ही में राज्य सरकार द्वारा अगस्त्यमुनि और फ़ाटा से केदारनाथ के लिये पवन हंस नाम से हेलीकाप्टर सेवा आरंभ की है और इनका किराया उचित है। सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण मंदिर बंद कर दिया जाता है और केदारनाथ में कोई नहीं रुकता। नवंबर से अप्रैल तक के छह महीनों के दौरान भगवान केदारनाथ की पालकी गुप्तकाशी के निकट उखिमठ नामक स्थान पर स्थानांतरित कर दी जाती है। यहाँ के लोग भी केदारनाथ से आस-पास के ग्रामों में रहने के लिये चले जाते हैं। वर्ष 2001 की भारत की जनगणना के अनुसार केदारनाथ की जनसंख्या 479 है, जिसमें 98% पुरुष और 2% महिलाएँ है। साक्षरता दर 63% है जो राष्ट्रीय औसत 59.5% से अधिक है (पुरुष 63%, महिला 36%)। 0% लोग 6 वर्ष से नीचे के हैं।


यहां स्थापित प्रसिद्ध हिन्दू तीर्थ केदारनाथ मंदिर अति प्राचीन है। कहते हैं कि भारत की चार दिशाओं में चार धाम स्थापित करने के बाद जगतगुरु शंकराचार्य ने 32 वर्ष की आयु में यहीं श्री केदारनाथ धाम में समाधि ली थी। उन्हीं ने वर्तमान मंदिर बनवाया था। यहां एक झील है जिसमें बर्फ तैरती रहती है इस झील के बारे में प्रचलित है इसी झील से युधिष्ठिर स्वर्ग गये थे। श्री केदारनाथ धाम से छह किलोमीटर की दूरी चौखम्बा पर्वत पर वासुकी ताल है यहां ब्रह्म कमल काफी होते हैं तथा इस ताल का पानी काफी ठंडा होता है। यहां गौरी कुण्ड, सोन प्रयाग, त्रिजुगीनारायण, गुप्तकाशी, उखीमठ, अगस्तयमुनि, पंच केदार आदि दर्शनीय स्थल हैं। केदारनाथ आने के लिए कोटद्वार जो कि केदारनाथ से 260 किलोमीटर तथा ऋर्षिकेश जो कि केदारनाथ से 229 किलोमीटर दूर है तक रेल द्वारा आया जा सकता है। सड़क मार्ग द्वारा गौरीकुण्ड तक जाया जा सकता है जो कि केदारनाथ मंदिर से 14 किलोमीटर पहले है।

यहां से पैदल मार्ग या खच्चर तथा पालकी से भी केदारनाथ जाया जा सकता है। नजदीक हवाई अड्डा जौली ग्रांट 246 किलोमीटर दूरी पर स्थित है, यहां से केदारनाथ के लिए हवाई सेवा हाल ही में शुरू हुई है। हिमालय के पवित्र तीर्थों के दर्शन करने हेतु तीर्थयात्रियों को रेल, बस, टैक्सी आदि के द्वारा हरिद्वार आना चाहिए। हरिद्वार से उत्तराखंड की यात्राओं के लिए साधन उपलब्ध होते हैं। हरिद्वार से केदारनाथ की दूरी 247 किलोमीटर है। हरिद्वार से गौरीकुण्ड 233 किलोमीटर की यात्रा मोटरमार्ग से की जाती है, जबकि गौरी कुण्ड से केदारनाथ तक 14 किलोमीटर की दूरी पैदल मार्ग से जाना पड़ता है। पैदल चलने में असमर्थ व्यक्ति के लिए गौरी कुण्ड से घोड़ा, पालकी, पिट्ठू आदि के साधन मिलते हैं। यह यात्रा हरिद्वार से ऋषिकेश, देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, तिलवाड़ा, अगस्त्यमुनि कुण्ड, गुप्तकाशी, नाला, फाटा, रामपुर, सोनप्रयाग, गौरीकुण्ड, रामबाढ़ा और गरुड़चट्टी होते हुए श्रीकेदारनाथ तक पहुँचती है।

More Post

तिरुपति, आंध्र प्रदेश में तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर

आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित, तिरुपति भगवान वेंकटेश्वर मंदिर के लिए जाना जाता है, जो देश में सबसे अधिक देखे जाने वाले तीर्थस्थलों में से एक है। तिरुमाला, तिरुपति की सात पहाड़ियों में से एक है, जहां मुख्य मंदिर स्थित है। माना जाता है कि मंदिर को वहीं रखा गया है जहां भगवान वेंकटेश्वर ने एक मूर्ति का रूप धारण किया था

A psychiatrist has identified seven early indicators that your child is experiencing mental stress.

Suicide among children, adolescents, and young adults is becoming a tragic trend that we witness far too frequently; it is no longer an unimaginable rarity. Recent cases of a class 4 student in Jaipur and a class 10 student in Delhi, these incidents aren’t isolated headlines; they are reminders that something is deeply wrong with how young minds are coping today. Childhood is frequently idealized as a carefree period of life, full of play, education, and minor concerns. However, the reality is much more nuanced.

कानपुर शहर के सबसे पुराने मेमोरियल चर्च, इनकी अनूठी शिल्पकला आज भी लोगों को आकर्षित करती है

क्रिसमस के दिन  चर्चों में लोगों को प्रभु यीशु के सामने प्रार्थना करते देखा जा सकता है। चूंकि प्रत्येक चर्च का अपना अलग इतिहास होता है।

Exploring the Jain Way of Life: A Journey of Compassion

The Three Bases of Jainism: The three core tenets of Jainism are referred to as the "Three Jewels" or "Ratnatraya." These are the three: Samyak Jnana (right knowledge), Samyak Darshana (right faith), and Samyak Charitra (right conduct). Advocates of these beliefs contend that following them results in emancipation from the cycle of birth and death and spiritual enlightenment.